राष्ट्रीय चिंतन शिविर को सिर्फ गंगा स्नान का माध्यम ना समझे पदाधिकारी : राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह

(संवाददाता News Express18)

गाजियाबाद। भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने एक विज्ञाप्ति के माध्यम से कहा कुछ पदाधिकारी राष्ट्रीय चिंतन शिविर को सिर्फ और सिर्फ गंगा स्नान का माध्यम समझते हैं। (2) राष्ट्रीय चिंतन शिविर का मकसद देशाटन के अलावा संगठन को मजबूत कैसे किया जाए? संगठन की आगे की रणनीति क्या होनी चाहिये? किसी प्रदेश या जिले के पदाधिकारियों में कोई विवाद है तो उसका निस्तारण क्या है? हमारे संगठन में कहाँ- कहाँ संगठन निष्क्रिय चल रहा है? हमारे संगठन में कौन- कौन पदाधिकारी पद लेकर चादर तान कर सो गए हैं उनके विषय में क्या सोचा जाए? किस जिले में क्या- क्या मुद्दे हैं? प्रदेश और देश व्यापी मुद्दों पर चर्चा करना और प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित करना।
अपने संगठन का शक्ति प्रदर्शन करना।

सभी पदाधिकारियों का आपस में एक दूसरे से मेल मिलाप होना परिचय होना। हम जितनी अधिक भीड़ जुटा पाते हैं उतना राष्ट्रीय नेत्रत्व का अपने संगठन और कार्यकर्ताओं पर अटूट विश्वास पैदा होना। जिसके बल पर राष्ट्रीय नेत्रत्व बड़ी से बड़ी लड़ाई लड़ने के लिए मजबूत हो जाता है हमारे संगठन की ताकत का अहसास हो जाता है। इसलिए चलो सखी उस देश को जहाँ कृष्ण का राज नहा धोए तीर्थं करें, एक पंथ दो काज। हमने महसूस किया है कि जो पदाधिकारी गंगा स्नान में विश्वास नहीं रखते हैं या मथुरा शिविर में मंदिरों के दर्शन को महत्व नहीं देते हैं वह शिविर में अपनी हाजरी बहुत कम देते हैं इसलिए उनकी नज़र में राष्ट्रीय चिंतन शिविर का कोई महत्व नहीं है।

इसलिए इस प्रकार की कोई पाबंदी नहीं है कि शिविर में आकर गंगा स्नान या मंदिरों के दर्शन अनिवार्य हैं। इस प्रकार की कोई भी पाबंदी नहीं है जरूरी नहीं गंगा स्नान या मंदिरों के दर्शन। परंतु शिविर में आना अनिवार्य है। जो पदाधिकारी राष्ट्रीय चिंतन शिविर को गंभीरता से नहीं लेंगे उन पदाधिकारियों पर संगठन राष्ट्रीय सदन में विचार विमर्श करेगा। कि उनको क्या इनाम दिया जाए। संगठन को सफल बनाने की जिम्मेदारी सभी राष्ट्रीय, प्रदेश, मंडल, और जिला स्तर के पदाधिकारियों की होगी।

जिस बडे़ पदाधिकारी की लापरवाही सामने आयेगी इनाम पाने के लिए तैयार रहना होगा। थोड़ा कहना अधिक समझना।

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