विशेष: बॉलीवुड को लुभाती, उत्तराखण्ड की खूबसूरत वादियां

बॉलीवुड को लुभाती, उत्तराखण्ड की खूबसूरत वादियां

देहरादूनदिलीप कुमार अभिनीत ‘‘मधुमति’’, राजकपूर की ‘‘राम तेरी गंगा मैली’’, अमिताभ बच्चन की ‘‘गंगा की सौगंध’’, रणधीर कपूर की ‘‘पोंगा पंडित’’, मनोज कुमार की ‘‘सन्यासी’’, राजेश खन्ना की ‘‘कटी पतंग’’, दिलीप कुमार की मधुमति, सन्नी देओल की ‘‘अर्जुन पंडित’’ जैसे अनेक फिल्मों की शूटिंग उस दौर में हर्षिल, मसूरी, ऋषिकेश, नैनीताल, श्रीनगर, रानीखेत, देहरादून जैसे रमणिक स्थानों में हुयी है और बॉलीवुड का उत्तराखण्ड (तब उत्तर प्रदेश राज्य का पर्वतीय क्षेत्र) से अटूट नाता रहा है। नैनीताल, रानीखेत, मसूरी और ़ऋषिकेश बॉलीवुड के निर्माताओं की पसंदीदा शूटिंग स्थल रहे है।

बॉलीवुड ही नही आंचलिक फिल्मों के निर्माताओं के लिए भी यह क्षेत्र शूटिंग के लिए पसंदीता स्थल रहा है। राज्य गठन से पूर्व गढ़वाली और कुमाऊंनी बोली की अनेक आंचलिक फिल्मों की शूटिंग निर्माताओं द्वारा अपने संसाधनों से यहां की गई है। आंचलिक फिल्मों के निर्माताओं का इस क्षेत्र के प्रति लगाव की यह एक अनूठी मिसाल रही है। अस्सी के दशक में पाराशर गौड की फिल्म ‘‘जग्वाल’’ की पौड़ी जिले में पहली बार शूटिंग हुयी। सामाजिक ताने बाने पर बनी इस फिल्म ने उस समय आंचलिक सिनेमा के लिए एक नई उम्मीद जगा दी थी। इसके बाद ‘‘घरजवैं’’, ‘‘बेटी-ब्वारी’’, चक्रचाल जैसी अनेक कुमाऊंनी बोली की फिल्मे सुर्खियों में आयी। इसके साथ ही वर्ष 1987 में कुमाऊंनी बोली की प्रथम फिल्म जीवन बिष्ट द्वारा निर्मित ‘मेघा आ’’ प्रदर्शित हुयी। आंचलिक बोलियों में बनने वाली इन फिल्मों की शूटिंग से उत्तराखण्ड के ये स्थान तो परदे में दिखायी दिए, लेकिन सरकारी सहायता न मिलने के कारण और सिनेमा हॉल इनके प्रदर्शन के लिए ठीक प्रकार से न मिलने के कारण आंचलिक सिनेमा उस तेजी से आगे नही बढ़ पाया, जिसकी उम्मीद थी। राज्य गठन के पश्चात इन बोलियों में बनने वाली फिल्मों को शूटिंग, फिल्मांकन और सिनेमा हॉल उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने अब एक कारगर व्यवस्था कर दी है। उत्तराखण्ड का निर्माण होने के पश्चात आज यह क्षेत्र फिल्मकारों के लिए एक बहुत तेजी से उभरता हुआ फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बन गया है। केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा फिल्मों की शूटिंग के लिए यहां एक बहुत शानदार वातावरण तैयार कर दिया है। मुम्बई और दक्षिण भारत तथा कलकत्ता से देहरादून की हवाई कनैक्टिविटी विकसित हो जाने से यहां शूटिंग के लिए बेहतर वातावरण बन गया है। वहीं कुमाऊं क्षेत्र में पन्तनगर हवाई अड्डे के विकास होने से बॉलीवुड के निर्माता उस क्षेत्र के शूटिंग स्थलों में फिल्मों की शूटिंग के लिए तेजी से आ रहें है।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय बताते है कि राज्य सरकार द्वारा फिल्मों के लिए बेहतर वातावरण देने और शूटिंग स्थलों को विकास करने के कारण भारत सरकार ने भी प्रदेश को पूरा प्रोत्साहन दिया है और राज्य गठन के पश्चात फिल्मों के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए अब तक राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें वर्ष 2022 में 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में उत्तराखण्ड को मिला डवेज थ्पसउ थ्तपमदकसल ैजंजम ;ैचमबपंस डमदजपवदद्ध पुरस्कार, वर्ष 2017 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अन्तर्गत ैचमबपंस डमदजपवद ब्मतजपपिबंजम वित थ्पसउ थ्तपमदकसल म्दअपतवदउमदज पुरस्कार, वर्ष 2017 में पर्यटन पुरस्कार के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य को “राष्ट्रीय फिल्म संवर्धन हितैषी राज्य” का पुरस्कार, वर्ष-2018 के तहत सर्वश्रेष्ठ फिल्म प्रमोशन फ्रेण्डली स्टेट पुरस्कार एवं वर्ष-2019 में मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का प्रथम पुरस्कार मिला है। उन्होंने बताया कि अभी तक हिन्दी, गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी फिल्मों की लगभग 1180 शूटिंग प्रदेश में हो चुकी है। डॉ. उपाध्याय बताते है कि प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग के लिए नये स्थलों को भी विकसित किया जा रहा है। फिल्मकारों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए आंचलिक बोली की फिल्मों को प्रोत्साहन देने के लिए तथा प्रदेश को फिल्मों का बेहतर हब बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक बेहद आकर्षक फिल्म नीति लागू कर दी गई है।

प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग को बढ़ावा देने, प्रदेश के प्रमुख स्थलों का फिल्मों के माध्यम से देश-दुनिया में प्रचार करने के लिए अब इस नीति में न केवल बॉलीवुड, बल्कि अन्य भाषाओं की फिल्मों तथा स्थानीय बोली की फिल्मों की शूटिंग के लिए आकर्षक प्राविधान किए गए है। पहली बार प्रदेश में वेब सीरिज, ओ.टी.टी. प्लेटफार्म, टी.वी. सीरियल की शूटिंग के लिए भी सरकार अनुदान की व्यवस्था लाई है। फिल्मों की शूटिंग के लिए अच्छे तथा नये स्थल विकसित करने के लिए योजना शुरू की गई है। गढ़वाली, कुमांऊनी और जौनसारी बोलियों में यहां फिल्म बनाने वालो के लिए अनुदान की धनराशि आठ गुना बढ़ा दी गई है। एक खास बात जो लाई गई है, वह प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में नई लोकेशन पर शूटिंग करने पर फिल्मकारों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान की व्यवस्था भी सरकार ने कर दी है और इस लोकेशन का नाम दिखाने पर भी अतिरिक्त धनराशि देने की व्यवस्था की गई है। स्थानीय लोगो के रोजगार की भी व्यवसथा कर सरकार ने यहां के युवाओं को फिल्म उद्योग से जोड़ने का काम किया है।

पर्वतीय क्षेत्र में आंचलिक फिल्मों के प्रदेशभर में सरकार सहयोगी बन रही है और यहां बंद पड़े सिनेमाघरों को दुबारा शुरू करने के लिए भी आगे आ रही है। राज्य की इस नई फिल्म नीति से हिन्दी एवं अन्य भाषाओं के साथ-साथ आंचलिक बोलियों की फिल्मों की शूटिंग के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार किया गया है। बॉलीवुड से उत्तराखण्ड आने वाले निर्माताओं एवं फिल्मकारों द्वारा यहां के शूटिंग स्थलों की सराहना इस बात का परिचायक है कि आज उत्तराखण्ड देश में फिल्मों की शूटिंग के लिए एक उभरता हुआ डेस्टिनेशन बन गया है। राज्य एवं केन्द्र सरकार का सहयोग स्थानीय फिल्मकारों की भूमिका एवं इस दिशा में राज्य को मिलने वाले पुरस्कारों से अब देश-दुनिया में फिल्मों में क्षेत्र में राज्य की अलग पहचान बन गई है।

(डॉ. अनिल चन्दोला,
पूर्व अपर निदेशक, सूचना विभाग
)

नोट – विशेष सहयोग सुरेश चन्द्र भट्ट, सूचना विभाग।
फोटो संलग्न ।

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